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sankalan

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” खुशी का मनोवैज्ञानिक सिद्धांत “

खुशी का कोई फार्मूला नही होता | यदि फार्मूला होता तो खुशी भी बाजार में बिकती और दुनिया के तमाम धनवान खुश नजर आते | किन्तु ऐसा संभव नही है | भूल जाना जरूरी है किन्तु हम भूलना पसंद नहीं करते | वही सब कुछ बेवजह याद करते रहते हैं जो भुला दिया जाना चाहिए था | दौलत की तरह खुशियाँ नहीं बंटती जब कि खुशियाँ बंटनी चाहिए | दुर्भाग्य यह है कि परिवार बंट रहे हैं , समाज बंट रहा है और तो और देश भी बाँटने के षड्यंत्र रचे जा रहें हैं |
जीवन में सफलता एक दिन का चमत्कार नही है | कठोर परिश्रम और मेहनत ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है | अगर हम यह समझ लें कि हमें जो कुछ भी मिला है , वह ईश्वर की कृपा है तो जीवन जीना आसान हो जायेगा | विनयशीलता और दूसरों का आदर हमेशा बड़ा बनाते हैं | सबसे जरूरी है , छोटे – छोटे सुखों में अपनी खुशी तलाशना | हमें चाहिए कि सीमाओं के भीतर सादा जीवन जियें , अपनी पूंजी बांटे , खुशियाँ बाँटें | खुशी अपने भीतर होती है , उसे पहचानने की जरूरत है | सुख का सभी इन्तजार करते हैं लेकिन यह भी याद रखना जरूरी है कि सुख कभी अकेला नही आता | वह अपने साथ – साथ संताप , दुखः , पीड़ा , कुंठा और भय भी लिए आता है | अतः हर पल को जीना सीखना जरूरी है | जिस तरह हम खुशियों के लिए बाँहें [...]

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” संगत का परिणाम “

एक राजहंस था | वह अपने बंधु – मित्रों से मिलने दूर देश गया था | बहुत दिन हो गए तो वहां से लौटने लगा | लम्बी यात्रा के कारण वह बहुत थक गया था | एक जगह उसे एक सुन्दर बगीचा नजर आया | वह विश्राम करने के लिए वहीँ रूक गया | उसी समय उस उद्यान में राजकुमार भी भ्रमण करने आया हुआ था | राजकुमार राजहंस की सुन्दरता पर मुग्ध हो गया | उसने हंस को वहीँ ठहरने को कहा | हंस ने उसकी बात मान ली | वह राजकुमार के साथ हाथी पर बैठकर सैर करता , मौज करता , मोती चुगता , बहुत प्रसन्न रहता | उसी उद्यान में एक पेड़ पर कौआ रहता था | उसे राजहंस और राजकुमार की मित्रता पर बहुत ईर्ष्या होती | वह भी उन दोनों का धर्म-भाई बन गया | अब कौआ भी हौद में बैठकर हाथी पर सैर करता और फल -फूल खाकर मौज करता |
कुछ दिन इसी तरह बीते | हंस को अपने घरवालों की याद सताने लगी | वह राजकुमार से विदा लेकर उड़ने लगा तभी कौआ बोला – ” भाई ! रस्ते में एक दिन के लिए मेरे घर भी ठहरो | ” हंस ने कहा -” ठीक है भाई ! तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ | जहाँ तुम्हारा घर आ जाये , मुझे बता देना | ” धूर्त कौआ हंस की पीठ पर बैठ कर उड़ते हुए हंस के पंख कुतरने लगा | कौए का घर आते ही हंस नीचे उतरा और अपनी [...]

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“भगवान राम और भगवान कृष्ण”

भगवान् राम का चरित्र सर्वथा अनुकरणीय है | उनकी लीला का अनुकरण करो तो भगवान मिलेंगे | भगवान कृष्ण का चरित्र   चिंतनीय है | श्री कृष्ण की लीला चिंतन करने के लिए और चिंतन करके तन्मय होने के लिए है | राम ने ” जो किया ” वह करना है परन्तु श्री कृष्ण ने ” जो कहा ” वह करना है | जब तक राम नहीं आते हैं , तब तक कृष्ण भी नहीं आते हैं | भागवत में मुख्य कथा श्री कृष्ण है | फिर भी राम के आगमन के पश्चात् ही श्री कृष्ण का आगमन होता है | जिसके घर में राम नहीं आते हैं , उसके रावण रूपी काम का नाश नहीं होता और जब तक काम रूपी रावण नहीं मरता , तब तक श्री कृष्ण नहीं आते हैं | इस काम रूपी रावण को ही मारना है | आप चाहें किसी भी सम्प्रदाय के हों , जब तक आप राम की मर्यादा का पालन नहीं करेंगे , आनंद नहीं मिलेगा | मनुष्य को थोड़ा सा धन संपत्ति मिलते ही मर्यादा को भूल जाता है |
राम जी का माता -प्रेम, पिता -प्रेम, भाई – प्रेम , एक पत्नी व्रत आदि सभी कुछ जीवन में उतारने योग्य है |श्री कृष्ण जो करते थे वही सब कुछ करना क्या हमारे लिए संभव है? उन्होंने तो कालिया नाग को वश में करके उसके सिर पर नृत्य किया था | गोवर्धन पर्वत को भी उंगली पर उठा लिया था | क्या हम कर पायेगें ? श्री कृष्ण का [...]

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