ॐ ही रक्षक हमारे सब गुणों की खान है |
भू : सदा सब प्राणियों के प्राण के भी प्राण है |
भुव : सब दुःख दूर करते कृपा निधान हो |
स्व : सदा सुख रूप सुखमय सतत सुख महान हो |
तत वही विख्यात ब्राह्मण वेद वर्णित सार हो |
देवसवितर सर्व उत्पादन हो पालन हार हो |
शुभ वरेंनियम वरण करने योग्य भगवान आप हो |
शुभ भर्गो मल रहित निर्लेप हो निष्पाप हो |
दिव्यगुण देवस्य दिव्य स्वरुप देव अनूप हो |
धीमहि धारे ह्रदय में दिव्य गुण गुणरूप हो |
धियोयोन : वह हमारी बुद्धियों का हित करे |
अमर प्रचोदयात नित सन्मार्ग में प्रेरित करे |
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