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Hindi

‘ जीवन के चार सच ‘

 

ये हैं जीवन के चार सच:

किसी ने जीवन को सपना कहा है, तो किसी ने पहेली| किसी को लगता है की ज़िन्दगी में जो कुछ भी होना है, सब किस्मत के हाथ में है| दूसरी तरफ वे लोग हैं जो पुरुषार्थ यानि की मेहनत मशक्कत की भूमिका को अहम् मानते हैं|

जहाँ भाग्यवादी ज़िन्दगी की हर घटना के लिए भाग्य को ही ज़िम्मेदार ठहराते हैं, वहीँ कर्मवादियों को मानना है की व्यक्ति खुद ही अपने भाग्य का निर्माण करता है| इन अलग – अलग तरह की बातों को सुनकर एक आम इंसान दुविधा में पड़ जाता है, की आखिर ज़िन्दगी का असल सच क्या है? इसी दुविधा को मिटाने का काम किया है महात्मा बुद्ध ने – जिन्होंने इंसानी ज़िन्दगी के सच से पर्दा उठाते हुए बताया की ज़िन्दगी के चार ही सच हैं, जो की इस प्रकार हैं -

(१) इस संसार में दुःख अनिवार्य है, पूरी तरह से दुखों से मुक्ति संसार में रहते हुए संभव नहीं है|

(२) इस दुःख का एक कारण है, जिसे दूर करने से इन दुखों से छुटकारा पाया जा सकता है|

(३) दुखों का प्रमुख कारण इच्छा या वासनायें ही हैं|

(४) कभी पूरी न होने वाली इन इच्छाओं और वासनाओं को नष्ट करके ही इन दुखों को दूर किया जा सकता है|

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Discussion

One comment for “‘ जीवन के चार सच ‘”

  1. बहुत ही ज्ञान्बर्धक प्रसंग है. जीवन के सही मूल्यों को दरसाया गया है.

    Posted by anandpurnanand | January 31, 2012, 4:43 pm

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