भगवान् श्री कृष्ण का एक अनन्य भक्त था | वह बृन्दावन में प्रभु की उपासना में लीन रहता था | घंटो प्रभु के अलौकिक रूप को निहारता , परन्तु गिरधर ने उसे कभी भी दर्शन नही दिए | एक दिन भक्त हताश होकर चिल्लाने लगा – मै बड़ा अधम हूँ , इसीलिए मुरलीधर ने मुझे दर्शन नहीं दिए | अच्छा यही होगा कि मैं अपने प्राण त्याग दूँ | यह सोचकर भक्त अँधेरा होते ही अपनी कुटिया से निकल , यमुना कि ओर चल दिया | उसने निश्चय किया कि आज यमुना जी की पवित्र लहरों में कूदकर अपने प्राण त्याग दूंगा | इसी विचार में उलझा हुआ , वह यमुना तट की ओर जा रहा था कि एक कोढ़ी ने उसके पैर पकड़ लिये | दरअसल श्री कृष्ण ने उस कोढ़ी को सपने में यह कह दिया था कि कुछ देर बाद इधर से एक भक्त यमुना कि ओर जायगा | तू उसके पैर पकड़ लेना ओर कहना कि वह तेरा कोढ़ दूर कर दे कोढ़ी ने पैर पकड़े तो भक्त सकपका कर बोला – मुझ जैसे अभागे के पैर क्यों पकड़ते हो ? किसी साधू – महात्मा के पैर पकड़ो , तुम्हारा कल्याण होगा |
कोढ़ी गिड़गिडाकर बोला – ‘मेरा कोढ़ दूर कर दो | तुम प्रभु से कह दोगे तो मेरा रोग मिट जाएगा’ | भक्त मायूस होकर बोला – भाई ! अगर ऐसा ही होता तो मैं आज अपने प्राण नहीं त्याग रहा होता | मैं कई सालो से कृष्ण- बिहारी की अराधना कर रहा हूँ परन्तु आज तक उसने मुझे दर्शन तक नहीं दिये | भला मेरी और क्या बात सुनेगे ? कोढी बोला -भक्त हो, तो एक बार सच्चे मन से पुकार कर तो देखो | केवल इतना कह दो कि हे गोपाल , इस कोढी का कोढ़ दूर कर दो | फिर तुम्हे और कुछ नही करना | कोढी से पिंड छुडाने के लिये भक्त ने करुणा भरे स्वर में बांके- बिहारी को पुकारा -हे वंशीधर ! इसका कोढ़ दूर कर दो |
देखिये प्रभु का चमत्कार ! भक्त का इतना कहना था कि कोढी रोगमुक्त हो गया | देखते ही देखते उसकी काया निरोगी हो गयी | यह देखते ही भक्त चकित हो गया | उसने यमुना में कूदने का विचार त्याग दिया | अपनी कुटिया में लौटा तो उसे नींद नही आयी | सुबह होते ही वह बिहारी जी के दर्शनों को पहुंचा | उसे लगा कि मूरत उसकी ओर देखकर मुस्करा रही है | उसने हाथ जोड़ लिये | बोला – यह कैसी लीला है मुरारी ? आपने अनेक वर्षों की अराधना के बाद भी मुझें दर्शन नहीं दिया | आज मुझे कैसे निहाल कर दिया ? बाके बिहारी मुस्कराकर बोले भक्त ! तुमने मुझसे कुछ माँगा ही कहाँ जो मै तुम्हे देता ? पहली बार तुमने एक दुखी कोढ़ी को ठीक करने कि प्रार्थना की और मैंने तुम्हारी बात मान ली | भगवान् को तो भक्त की बात माननी ही पड़ती है | भक्त ख़ुशी के मारे रो पड़ा |
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रेअल्ली कृष्णा इस सो मेर्सिफुल्ल
हरे कृष्णा
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