किशनपुर गाँव के लोग डकैतों से परेशान थे | डकैत आये दिन गाँव में आते और लूट कर चले जाते | एक बार गाँव में एक साधू आया | उसे गाँव वालों ने अपनी परेशानी बतायी तो साधू ने कहा – ” तुम सब दस – दस रूपये दो तो बताऊँ | गाँव वालों ने रूपये इकठ्ठे किये और साधू को दे दिए | लेकिन साधू उसी रात कहीं गायब हो गया | डकैत फिर आये और गाँव लूट कर चले गए | पंद्रह दिन बाद साधू फिर गाँव आया गाँव वाले नाराज होकर बोले – महाराज ! आप तो धोखेबाज निकले |
साधू ने कहा – भाई ! मई तुम्ही लोगों के काम से गया था | परन्तु प्रति परिवार पचास रूपये से कम में बात नही बनी | गौण वाले बोले – ठीक है , हम सब पचास – पचास रूपये देते हैं | मगर अब उपाय बता ही देना | पर अबकी बार फिर वही हुआ | उसी शाम साधू रूपये लेकर कहीं चम्पत हो गया | कई दिन गुजर गए | डकैती का सिलसिला जारी रहा | करीब ६ महीने बाद साधू फिर गाँव में आया | गाँव वालों ने उसे खूब उल्टा – सीधा कहा | बोले – भाई ! तुम कैसे साधू हो ? हमारे रूपये लेकर भी उपाय बताये बिना फरार हो जाते हो | साधू बोला – क्या करूं ! मैंने खूब कोशिश की पर बात बनी नही | सौ रूपये प्रति घर के हिसाब से दो , तो उपाय बैठ सकता है |
साधू की बात सुनकर गाँव वालों को गुस्सा आ गया बोले – तुम तो कोई व्यापारी या ठग लगते हो | तुम ऐसे नही मानोगे | तुम्हारे हाथ – पैर तोड़ने पड़ेंगे | कह कर गाँव वाले लाठी , वल्लभ , भाला आदि ले आये और साधू की तरफ दौड़े | साधू अपने प्राण बचाकर भागते हुए बोला – अरे , रूको – रूको | मिल गया है | अब गाँव वाले चौंके ! बोले – पहले क्यों नही बताया ? साधू ने कहा – मूर्खों ! पहले तुम समझ नही पाते | अब समझोगे तुम्हारे बचाव का उपाय है – एकता | सौ रूपये देने के नाम पर तुम सब एक जुट हो गए और मेरे प्राण लेने पर उतारू हो गए और डकैत तुमसे हजारों – लाखों का माल लूट ले जाते हैं तो तुम नामर्दों की तरह एक – दूसरे का मुह देखते हो | जिस दिन से तुम डकैतों का विरोध करने लगोगे ,उसी दिन से वे तुम्हारे गाँव में आने से ही घबराने लगेंगे | साधू की बात सुनकर गाँव वाले श्रद्दा वश उसके चरणों में गिर पड़े | उसी दिन से वे एकता से रहने लगे |
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